منظومه عرفانی شیخ صنعان و دختر ترسا
منظومه عرفانی شیخ صنعان و دختر ترسا/
| •پدید اورندگان : | محمد وحدتهندی , محمد خواجوی , |
| •ناشر : | مولی |
| •سال نشر : | 1382 |
| • نوع کتاب : | تالیف |
| • رده سنی : | 0 |
| • تیراژ : | 1200 |
| • نوع جلد : | شومیز |
| • شابک : | 964-5996-58-9 |
| • تاریخ نشر : | 1382/11/5 |
| • محل نشر : | تهران |
| • زبان : | فارسی |
| • زبان اصلی : | |
| • تعداد صفحات : | 176 |
| • قیمت : | 20000 |
| • نوبت چاپ : | 1 |
| • قطع : | رقعی |
| • شماره جلد : | 0 |
| • چکیده : | این مثنوی كه با مایه های عرفانی سروده شده وصف عاشق شدن شیخ صنعان" بر دختر ترسا است كه پیش از این نیز "عطار" در "منطق الطیر" آن را به نظم كشیده و قبل از آن نیز در كتاب "تحفه الملوك" (منسوب به امام محمد عزالی) روایتی از آن آمده است. مثنوی سروده "وحدت هندی" با این ابیات آغاز می شود: به نام آن كه بی انجام و مبدا/ بود در عین كثرت فرد و یكتا/ حریم بی نیازی خلوت اوست/ جهان آیینه دار طلعت اوست/...." |
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