| رخت در آب رفت و کار افتاد | | کشتي عمر ما کنار افتاد |
| وز دهان در شاهوار افتاد | | موي همرنگ کفک دريا شد |
| با سر شاخ روزگار افتاد | | روز عمري که بيخ بر باد است |
| شورشي سخت در حصار افتاد | | سر به ره در نهاد سيل اجل |
| اين زمان کار با خمار افتاد | | مستييي بود عهد برنايي |
| خر نگونسار گشت و بار افتاد | | چون به مقصد رسم که بر سر راه |
| که به يک گل هزار خار افتاد | | گل چگويم ز گلستان جهان |
| پاي او در دهان مار افتاد | | هر که در گلستان دنيا خفت |
| در غم و رنج بي شمار افتاد | | هر که يک دم شمرد در شادي |
| چه کني چون چنين قرار افتاد | | بي قراري چرا کني چندين |
| نقد عمر تو کم عيار افتاد | | چه توان کرد اگر ز سکهي عمر |
| که نه اين کار اختيار افتاد | | تو مزن دم خموش باش خموش |
| ليک عطار اميدوار افتاد | | گر نبودي اميد، واي دلم |