| گنه چشمان کره دل مبتلا بي |
|
الهي دل بلا بي دل بلا بي |
| چه داند دل که خوبان در کجابي |
|
اگر چشمان نکردي ديده باني |
| سخنها واکريم غم وانمائيم |
|
بيا سوته دلان گردهم آئيم |
| هر آن سوته تريم وزنين تر آئيم |
|
ترازو آوريم غمها بسنجيم |
| ته کت زيبنده بالا دلربايي |
|
ته کت نازنده چشمان سرمه سائي |
| بمو واجي که سرگردان چرائي |
|
ته کت مشکين دو گيسو در قفائي |
| گل غم قسمت دامان ما بي |
|
جهان بيوفا زندان ما بي |
| همه گويا نصيب جان ما بي |
|
غم يعقوب و محنتهاي ايوب |
| شو هجران و روز غم سر آيو |
|
خوش آن ساعت که يار از در آيو |
| همي واجم که جايش دلبر آيو |
|
زدل بيرون کنم جانرا بصد شوق |
| که دايم چشم بختم پر نمک بي |
|
زشورانگيزي چرخ و فلک بي |
| پياپي سيل اشکم تا سمک بي |
|
دمادم دود آهم تا سما بي |
| هميشه با دل خرم نشينند |
|
خوشا آنان که با ته همنشينند |
| که گستاخانه آيند و ته بينند |
|
همين بي رسم عشق و عشقبازي |
| دلش از درد هجران ريشتر بي |
|
هر آنکس با تو قربش بيشتر بي |
| بجانم صد هزاران نيشتر بي |
|
اگر يکبار چشمانت بوينم |
| براهت تا سحر در انتظارم |
|
شوان استارگان يکيک شمارم |
| زديده اشک چون باران ببارم |
|
پس از نيمه شوان که ته نيايي |
| نه حرفي وانويسند و نه خوانند |
|
خوشا آنانکه هر از بر ندانند |
| ازين گو گل روند آهو چرانند |
|
چو مجنون سر نهند اندر بيابان |
| حديث از بيش و از کم واتشان بي |
|
سخن از هر چه واجم واتشان بي |
| هر آن گوهر که وينم واتشان بي |
|
بدريا گر روم گوهر بر آرم |
| سخنها ميکرم سودش نميبو |
|
دلي ديرم که بهبودش نميبو |
| در آتش مينهم دودش نميبو |
|
ببادش ميدهم نش ميبرد باد |
| بدين بيخانماني واکيان شم |
|
خدايا واکيان شم واکيان شم |
| ته که از در براني واکيان شم |
|
همه از در برانند سوته آيم |
| بهر لاله هزاران بلبلي بي |
|
بهار آيو به هر شاخي گلي بي |
| مبو کز مو بتر سوز دلي بي |
|
بهر مرزي نيارم پا نهادن |
| سرشک سرخ و روي زرد مو بين |
|
بيا جانا دل پردرد مو بين |
| همه برجان غم پرورد مو بين |
|
غم مهجوري و درد صبوري |
| ز رنگ روي تو دلخونم اي گل |
|
ز بوي زلف تو مفتونم اي گل |
| تو چون ليلي و من مجنونم اي گل |
|
من عاشق زعشقت بيقرارم |
| جواني هم بهاري بود و بگذشت |
|
بهار آيو به صحرا و در و دشت |
| دمي که گلرخان آيند به گلگشت |
|
سر قبر جوانان لاله رويه |
| کند فرياد مرگ اندر کمينه |
|
اگر شاهين بچرخ هشتمينه |
| در آخر منزلت زير زمينه |
|
اگر صد سال در دنيا بماني |
| غمي ديرم که هرگز کم نميبو |
|
دلي ديرم دمي بيغم نميبو |
| که يار بيوفا همدم نميبو |
|
خطي ديرم مو از خوبان عالم |
| واي ازين دل که آزارد مدامم |
|
واي ازين دل که ني هرگز بکامم |
| نچيده دانه اندازد بدامم |
|
واي ازين دل که چون مرغان وحشي |
| مو که دردم سبکباري نديره |
|
مو که يارم سر ياري نديره |
| چه خوابست اينکه بيداري نديره |
|
همه واجن که يارت خواب نازه |
| گهي نالان گهي گريان چرايم |
|
نميدانم که سرگردان چرايم |
| ندانم مو که بيدرمان چرايم |
|
همه دردي بدوران يافت درمان |
| بچشمان اشکم از خون جگر بي |
|
دل از دست غمت زير و زبر بي |
| دلش پر غصه جانش پر شرر بي |
|
هران ياري چو مو پرناز ديره |
| که دامان بر جهان افشاندني بي |
|
بدنياي دني کي ماندني بي |
| دلا يا ويلنا هم خواندني بي |
|
همي لا تقنطوا خواني عزيزا |
| بغير از معصيت چيزي نديدي |
|
از آن روزيکه ما را آفريدي |
| ز ما بگذر شتر ديدي نديدي |
|
خداوندا بحق هشت و چارت |
| شکسته پر و بالم چون ننالم |
|
مو که آشفته حالم چون ننالم |
| تو آيي در خيالم چون ننالم |
|
همه گويند فلاني چند نالي |
| به بختم گريه و زاري گره دل |
|
بشم واشم که تا ياري گره دل |
| که از جان و دلت ياري گره دل |
|
بگردي و نجوئي يار ديگر |
| صفابخش جمال گلرخان بي |
|
خدايي که مکانش لامکان بي |
| که بر هر بنده او روزي رسان بي |
|
پديد آرندهي روز و شب و خلق |
| نهال قامتش نخلي است نوبر |
|
گلش در زير سنبل سايه پرور |
| چو بلبل ناله و افغان برآور |
|
زعشق آن گل رعنا همه شب |
| تن سالم زبيمارش خبر ني |
|
دل شاد از دل زارش خبر ني |
| که آزاد از گرفتارش خبر ني |
|
نه تقصيره که اين رسم قديمه |
| روان بي درد عشق افسرده اولي |
|
دل ار عشقت نداره مرده اولي |
| که گل بي عشق حق پژمرده اولي |
|
سحر بلبل زند در گلشن آواز |
| همه زيبا به چشم ديگران بي |
|
هزاران لاله و گل در جهان بي |
| سرافراز همه آلاليان بي |
|
آلالهي مو به زيبايي درين باغ |
| خمار آلوده با جامي بسازد |
|
دل عاشق به پيغامي بسازد |
| رياضت کش ببادامي بسازد |
|
مرا کيفيت چشم تو کافيست |
| مدامش باغبون خونين جگر بي |
|
هر آن باغي که نخلش سر بدر بي |
| اگر بارش همه لعل و گهر بي |
|
ببايد کندنش از بيخ و از بن |
| بنازم گردش چرخ و فلک را |
|
ببندم شال و ميپوشم قدک را |
| بشويم هر دو دست بي نمک را |
|
بگردم آب درياها سراسر |
| وگر دلبر دل و دلرا چه نام است |
|
اگر دل دلبر و دلبر کدام است |
| ندونم دل که و دلبر کدام است |
|
دل و دلبر بهم آميته وينم |
| هواي ديگري اندر سرم نيست |
|
ته دوري از برم دل در برم نيست |
| تمناي دگر جز دلبرم نيست |
|
بجان دلبرم کز هر دو عالم |
| اجل قصدم کره و شير ژيونست |
|
شيرمردي بدم دلم چه دونست |
| تنم وا مرگ جنگيدن ندونست |
|
ز موشير ژيان پرهيز ميکرد |
| که تن از بهر موران پرورانست |
|
نفس شومم بدنيا بهر آن است |
| هرزه بورم بميدان جهانست |
|
ندونستم که شرط بندگي چيست |
| که اين درد دل تو بي علاجه |
|
قضا پيوسته در گوشم بواجه |
| همين اين جون تو که بي رواجه |
|
اگر گوهر ببي خواهون نداري |
| باغبانان دو دست از گل بداريد |
|
لاله کاران دگر لاله مکاريد |
| بيخ گل بر کنيد و خار بکاريد |
|
اگر عهد گلان اين بو که ديدم |
| گلم واچيد و خوابم را زيان کرد |
|
شوانم خواب در مرز گلان کرد |
| هزاران خار بر گل پاسبان کرد |
|
باغبان ديد که مو گل دوست ديرم |
| چنان گيجم که کافر هم موي ناد |
|
گيج و ويجم که کافر گيج ميراد |
| شمع و پروانه را پرويج ميداد |
|
بر اين آئين که مو را جان و دل داد |
| دلم تنگه شبي با مو بسر بر |
|
دمي بوره بوين حالم ته دلبر |
| به جاي گل زنم مو دست بر سر |
|
ته گل بر سر زني اي نو گل مو |
| طبيبم آوريد دردم کريد چار |
|
دلم زار و دلم زار و دلم زار |
| کره در مون دردم را بناچار |
|
طبيبم چون بوينه بر موي زار |
| سرشک از ديده بارانم شو و روز |
|
مو که سر در بيابانم شو و روز |
| هميدونم که نالونم شو و روز |
|
نه تب ديرم نه جايم ميکند درد |
| به اين بي خانماني برکياشم |
|
به اين بي آشنايي برکياشم |
| ته از در گر بروني برکياشم |
|
همه گر مو برونند واته آيم |
| مو آن محنت نصيب سخت جانم |
|
مو آن آزردهي بي خانمانم |
| که هر بادي وزد پيشش دوانم |
|
مو آن سرگشته خارم در بيابون |
| زدست يار بي پروا بناليم |
|
بوره سوته دلان با ما بناليم |
| اگر بلبل نناله ما بناليم |
|
بشيم با بلبل شيدا به گلشن |
| گل و سنبل به ديدار تو چينم |
|
بوره روزي که ديدار ته وينم |
| که تا سيرت بوينم نازنينم |
|
بوره بنشين برم سالان و ماهان |
| نويد وصل تو تا نشنوستم |
|
به عشقت اي دلارا نگروستم |
| بجز اندوه و خواري ندروستم |
|
بدل تخم وفايت کشتم آخر |
| کمند عنبرين تار ته وينم |
|
خوش آنساعت که ديدار ته وينم |
| مگر آن دم که رخسار ته وينم |
|
نوينه خرمي هرگز دل مو |
| کسي خواهد که پيغامش رسونم |
|
دلم دور است و احوالش ندونم |
| که ديداري بديدارش رسونم |
|
خداوندا ز مرگم مهلتي ده |
| از آنرويي که هر دو تيره روجيم |
|
بوره يکدم بناليم و بسوجيم |
| نبو جز درد و غم يک عمر روجيم |
|
ته بلبل حاش لله مثل مو ني |
| رخم گردين و خاکين چه واجم |
|
دلم دردين و نالين چه واجم |
| بصد مذهب منادين چه واجم |
|
بگرديدم به هفتاد و دو ملت |
| که دور افتاده از يار و ديارم |
|
از آن انگشت نماي روزگارم |
| بجز بر سرزدن چاره ندارم |
|
ندونم قصد جان کردن بناحق |
| که گريان در ته سنگ مزارم |
|
از آن دلخسته و سينه فگارم |
| سرا پا شور دارم شر ندارم |
|
بواجندم که ته شوري نداري |
| کسي واقف نبو از درد و سوزم |
|
بدل درد غمت باقي هنوزم |
| به سوز مو نبو کافر به روزم |
|
نبو يک بلبل سوته به گلشن |
| بهر گردش زند آتش بجانم |
|
فلک کي بشنود آه و فغانم |
| بکام دل نگردد آسمانم |
|
يک عمري بگذرانم با غم و درد |
| وامو پر بد مکه که دردمندم |
|
نذوني اي فلک که مستمندم |
| چو رشته مو بسامانت ببندم |
|
بيک گردش که ميکردي ببيني |
| ز جورت در گدازه استخوانم |
|
کنون داري نظر گو واکيانم |
| که آهم تير بو ناله کمانم |
|
بکه انديشهاي بيداد پيشه |
| ندونم در سفر يا در حضر بيم |
|
ز حال خويشتن مو بيخبر بيم |
| همين ذونم که عمري دربدر بيم |
|
فغان از دست تو اي بيمروت |
| مو در گلخن به خاکستر نشينم |
|
گلستان جاي تو اي نازنيننم |
| چو ديده واکرم جز ته نوينم |
|
چه در گلشن چه در گلخن چه صحرا |
| کافرم گر مني آبش بدارم |
|
کافرم گر مني آلاله کارم |
| دو صد داغ دل از آلاله دارم |
|
کافرم گر مني نامش برم نام |
| مگر مو لوک مست سر قطارم |
|
غم عالم همه کردي ببارم |
| فزودي هر زمان باري ببارم |
|
مهارم کردي و دادي به ناکس |
| هزاران ملک عقبي گر بدارم |
|
هزاران ملک دنيا گر بدارم |
| که بي روي تو آنرا گر بدارم |
|
بوره ته دلبرم تا با ته واجم |
| به آب ديدکان کشتي برانم |
|
تو خود گفتي که مو ملاح مانم |
| درين درياي بي پايان بمانم |
|
همي ترسم که کشتي غرق وابو |
| زدي بر خمرهي نيلي لباسم |
|
فلک بر هم زدي آخر اساسم |
| بکن آخر ازين دنيا اساسم |
|
اگر داري برات از قصد جانم |
| چرا از نازنينم دور باشم |
|
مو که مست از مي انگور باشم |
| چرا از دود محنت کور باشم |
|
مو که از آتشت گرمي نوينم |
| به سينه اش خنجري تا دسته وينم |
|
الهي دشمنت را خسته وينم |
| سحر آيم مزارش بسته وينم |
|
سر شو آيم احوالش بپرسم |
| همه خوني همه خوني همه خون |
|
دلا خوني دلا خوني دلا خون |
| چو مجنوني چو مجنوني چو مجنون |
|
ز بهر ليلي سيمين عذاري |
| نشينن هر دو پا پيچن به دامان |
|
خوشا آنان نه سر دارند نه سامان |
| بياد روي دلداران مدامان |
|
شو و روزان صبوري پيش گيرن |
| مو آئين کس مبو در دين و آئين |
|
بعالم کس مبادا چون من آئين |
| مو آئين بي مو آئين بي مو آئين |
|
هر آنکو حال موش باور نميبو |
| مکه کاري کز آن گردي پشيمان |
|
بوره اي دل بوره باري بشيمان |
| باشه روزي که گل چينيم بدامان |
|
يه دو روزي بناکامي سرآريم |
| اندرون دلم خون کشته پالان |
|
دلم از دست ته نالانه نالان |
| همه قولان ته بالان بالان |
|
هزاران قول با ما بيش کردي |
| گريبان بلرزان وا ته لرزان |
|
ته سر ورزان مو سوداي ته ورزان |
| هران وينان احوال ته پرسان |
|
کفن در کردنم صحراي محشر |
| ازو کو التجا وا که بريمان |
|
ز ياد خود بيا پروا کريمان |
| نداره تاب اين سام نريمان |
|
کيه اين تاب داره تا مو دارم |
| بکشيم دست از خوان ليمان |
|
بوره منت بريم ما از کريمان |
| که بر خوانش نظر دارند کريمان |
|
کريمان دست در خوان کريمي |
| ز کردارت نبي يک جو پشيمان |
|
زدست مو کشيدي باز دامان |
| که تا از وي رسد کارم بسامان |
|
روم آخر بداماني زنم دست |
| زدلتنگي بوم راضي بمردن |
|
دلم تنگ ندانم صبر کردن |
| ندانم عرض حالم واته کردن |
|
ز شرم روي ته مو در حجابم |
| آنکه بر گشته سامانه منم من |
|
آنکه بي خان و بي مانه منم من |
| آنکه روزش چو شامانه منم و من |
|
آنکه شادمان به انده ميکره روز |
| کارواني بوينم تا بشيمان |
|
پشيمانم پشيمانم پشيمان |
| به هرزه کوله باري ميکشيمان |
|
کهن دنيا بهيچ کسي نمانده |
| چراگاه مو بي سر بشن کوهان |
|
مو آن اسپيد بازم سينه سوهان |
| مو آن تيغم که يزدان کرده سوهان |
|
همه تيغي به سوهان ميکرن تيز |
| ويا نالم زغم چون مستمندان |
|
برندم همچو يوسف گر بزندان |
| مدام آيم بگلزار تو خندان |
|
اگر صد باغبان خصمي نمايد |
| عيار قلب خالص بوته دونو |
|
نواي ناله غم اندوته دونو |
| که قدر سوته دل دلسوته دونو |
|
بوره سوته دلان واهم بناليم |
| غمي دارم که پايانش نميبو |
|
سري دارم که سامانش نميبو |
| بوين دردي که درمانش نميبو |
|
اگر باور نداري سوي من آي |
| بسلطان عرب جانم تويي تو |
|
به والله که جانانم تويي تو |
| همي دونم که درمانم تويي تو |
|
نميدونم که چونم يا که چندم |
| چه غم کنده ببو بيخ و بن مو |
|
بهارم بي خزان اي گلبن مو |
| ته اي امروز دل تازه کن مو |
|
برس اي سوته دل يکدم به دردم |
| بجز خونابه اش نه حاصل مو |
|
نيا مطلق بکارم اين دل مو |
| چه پروايي کره اينجا دل مو |
|
داره در موسم گل جوش سودا |
| سر پل صراطم ماجرا بو |
|
واي از روزي که قاضيمان خدا بو |
| واي از آندم که نوبت زان ما بو |
|
بنوبت بگذرند پير و جوانان |
| بعالم همچو مو ديوانهاي نه |
|
چو مو يک سوته دل پروانهاي نه |
| من ديوانه را ويرانهايي نه |
|
همه مارون و مورون لانه ديرن |
| وگرنه در جهان بسيار ياره |
|
مو را اي دلبر مو با ته کاره |
| چو مو بلبل به گلزارت هزاره |
|
کجا پرواي چون مو سوته ديري |
| شوانم جا و روزانم خورش نه |
|
درين بوم و برانم پرورش نه |
| تني ديرم که پرواي سرش نه |
|
سري ديرم که مغزي اندرو نه |
| ندوني درد دل اي بيوفا ته |
|
مو را درد دلم خو کرده واته |
| ته ذوني با دل و دل ذونه با ته |
|
بوره مو سوته دل واته سپارم |
| بدس هرگز نگيرم جام بي ته |
|
بدنيا مو نوينم کام بي ته |
| ندارم يک نفس آرام بي ته |
|
بلرزم روز و شو چون بيد مجنون |
| بياد روي پر نور گلانه |
|
سحرگاهان فغان بلبلانه |
| اثر در نالهي سوته دلانه |
|
ز آه مو فلک آخر خدرکه |
| بدرد سوز غم اندوتهاي نه |
|
بدنيا مثل مو دل سوتهاي نه |
| که اين زخم دلم لو سوتهاي نه |
|
چسان بندم ره سيل دو ديده |
| بدل پيوسته بيدرد و غم ته |
|
دل مو دايم اندر ماتم ته |
| خم قدم از آن پيچ و خم ته |
|
چه پرسي که چرا قدت ببوخم |
| سرم در رهن تيغ آبداره |
|
زغم جان در تنم در گير و داره |
| دل مو تاب اين سودا نداره |
|
ندارم اختياري از چه جوشش |
| که سنگ از آسمون انداتني نه |
|
به کس درد دل مو واتني نه |
| کسيس يارم که ترکش واتني نه |
|
بمو واجن که ترک يار خود که |
| بجاي جوهري جوهر نگيره |
|
دل مو غيرته دلبر نگيره |
| نبي ناسوته آذر در نگيره |
|
دل مو سوته و مهر ته آذر |
| خودم جلاد و بيجونم که کرده |
|
نذونم لوت و عريانم که کرده |
| ببينم عشق بر جونم چه کرده |
|
بده خنجر که تا سينه کنم چاک |
| کلاه عقلم از سر وا کني ته |
|
دو چشمم را ته خون پالا کني ته |
| نظر او را سوي صحرا کني ته |
|
اگر ليلي بپرسه حال مجنون |
| نه در دل فکر بهبودي نه بودي |
|
مو را نه فکر سودايي نه سودي |
| که هر چشمم هزارون زنده رودي |
|
نخواهم جو کنار و چشمه سارون |
| درد دلم ز بودردا بتر بي |
|
شوم از شام يلدا تيرهتر بي |
| درمان درد ما خود بي اثر بي |
|
همه دردا رسن آخر بدرمون |
| دگر رويي نه رنگش بي نه بويي |
|
پي مرگ نکويان گل نرويي |
| بجز بدنامي و بيآبرويي |
|
ز خود رو هيچ حاصل برنخيزد |
| که باشد همدم مو لالهرويي |
|
به جز اين مو ندارم آرزويي |
| دگر در کوهساران گل نرويي |
|
اگر درد دلم واجم به کوهان |
| هر که دردي نداره مردن اولي |
|
دل بي عشق را افسردن اولي |
| ذره ذره به آتش سوتن اولي |
|
تني که نيست ثابت در ره عشق |
| که در ديوان عشاقت بخوني |
|
من دل سوته را لايق ندوني |
| ز تو زيرا که بحر بيکروني |
|
هزارون بارم از خوني ببو کم |
| ازين گردش که داري برنگردي |
|
يقينم حاصله که هرزه گردي |
| بدين عادت که داري کي ته مردي |
|
بروي مو ببستي هر رهي را |
| سرم بو گوي ميدان خوشترم بي |
|
نپنداري که زندان خوشترم بي |
| گلستان بي ته زندان خوشترم بي |
|
چو گلخن تار و تاريکه به چشمم |
| امان جستن روز آخرزمان بي |
|
ز بيداد فلک يارون امان بي |
| که وامو آسمان پرسرگران بي |
|
اگر پاره کرم يخه بجا بو |
| خون دلم ز چشمان ريته اولي |
|
در اشکم بدامان ريته اولي |
| که حرف جور پنهان ريته اولي |
|
بکس حرفي ز جورت وانواجم |
| کجا رحمت باين خونين جگر بي |
|
دل تو کي ز حالم با خبر بي |
| کي از خونين جگرها با خبر بي |
|
تو که خونين جگر هرگز نبودي |
| همه موها مثال ژاله وا بي |
|
بسوي باغ و بستان لاله وابي |
| رهانم مو سوي بنگاله وا بي |
|
وگر سوي خراسان کاروان را |
| چو ويرانه که بوم آشانه ديري |
|
غم اندر سينهي مو خانه ديري |
| ازين غم هرچه در انبانه ديري |
|
فلک اندر دل مسکين مو نه |
| دامان از هر دو عالم در کشاني |
|
هر آن کالوند دامان مو نشاني |
| تا که دلبر بپايش برفشاني |
|
اشک خونين پاشم از راه الوند |
| ز مژگان تر مو ژاله نايي |
|
ز دل بيرون نبجتم ناله نايي |
| به بخت مو به چشم لاله نايي |
|
شوي نايه که مو خوابت بوينم |
| سخن از بيش و از کم واتهشان بي |
|
چه واجم هر چه واجم واتهشان بي |
| هر آن گوهر که ديدم واتهشان بي |
|
بدريا مو شدم گوهر برآرم |
| درونم چون درخت پي بگل بي |
|
دلم بلبل صفت حيران گل بي |
| درخت نهله بارش خون دل بي |
|
خونابه بار ديرم ارغوان وار |