| بود آشفته همچون موي فرخ |
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دل من در هواي روي فرخ |
| که برخوردار شد از روي فرخ |
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بجز هندوي زلفش هيچ کس نيست |
| بود همراز و هم زانوي فرخ |
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سياهي نيکبخت است آن که دايم |
| اگر بيند قد دلجوي فرخ |
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شود چون بيد لرزان سرو آزاد |
| به ياد نرگس جادوي فرخ |
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بده ساقي شراب ارغواني |
| ز غم پيوسته چون ابروي فرخ |
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دوتا شد قامتم همچون کماني |
| شميم زلف عنبربوي فرخ |
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نسيم مشک تاتاري خجل کرد |
| بود ميل دل من سوي فرخ |
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اگر ميل دل هر کس به جايست |
| چو حافظ بنده و هندوي فرخ |
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غلام همت آنم که باشد |