خورشیدی تا ابد
خورشیدی تا ابد/
| •پدید اورندگان : | مهسا ورزیدهكارتهرانی , |
| •ناشر : | حدید |
| •سال نشر : | 1385 |
| • نوع کتاب : | تالیف |
| • رده سنی : | 0 |
| • تیراژ : | 3000 |
| • نوع جلد : | شومیز |
| • شابک : | 964-6312-36-5 |
| • تاریخ نشر : | 1385/8/28 |
| • محل نشر : | تهران |
| • زبان : | فارسی |
| • زبان اصلی : | |
| • تعداد صفحات : | 159 |
| • قیمت : | 16000 |
| • نوبت چاپ : | 1 |
| • قطع : | رقعی |
| • شماره جلد : | 0 |
| • چکیده : | ,"در این دفتر، اشعاری به سیاق نو با مضامینی نظیر "حسرت"، "عشق"، "انتظار" و "غم" سروده شده است. برای نمونه: حتی شبها میخواهند دیگر تاریك نباشند/ یك دریا اشك، در دل ابرها جای نگیرد/ همه میخواهند خورشید بتابد/ دلواپسی رنگ شقایق بگیرد/ تمام دستها یك صدا رنگ بگیرد/ تا خورشیدی تا ابد باقی بماند/ اگر بیاید، اگر بتابد، اگر بماند/ چون مقدس است/ حتی اگر یك روز باشد/ خورشیدش تا ابد است/ خورشیدی تا ابد است/." |
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