| ملت ز تو شادمان ببينم | | چون قصد کني فتوح قنوج |
| سهم تو به نهروان ببينم | | گرد سپهت به نهرواله |
| تعظيم به خاوران ببينم | | تو خسرو خاور و ز امرت |
| زلزال به دامغان ببينم | | تو دامغ روم و از حسامت |
| کز ذات تو اين و آن ببينم | | دريا هبتي و کوه هيبت |
| هفت آينه در دکان ببينم | | از راي تو صيقل فلک را |
| آنجا سقر و جنان ببينم | | گر هيچ سپه کشي سوي شام |
| گل شکر اصفهان ببينم | | از خلق تو خار و حنظل شام |
| چون ارمن و نخجوان ببينم | | صور و عکه در امان امرت |
| دربان شه عسقلان ببينم | | سگبانت شه فرنگ يابم |
| بر قاهره قهرمان ببينم | | تو قاهر مصر و چاوشت را |
| برق گهر يمان ببينم | | روزي که در ابرسان يمينت |
| چون گاو زمين جبان ببينم | | شير فلک از نهيب گرزت |
| سوزان چو ز مه کتان ببينم | | از ماه درفش تو مه چرخ |
| شمشير تو سيل ران ببينم | | طوفان شود آشکار کز خون |
| اندر طوفان روان ببينم | | خنگ تو روان چو کشتي نوح |
| نصر الله در قرآن ببينم | | چون فال برآرمت ز مصحف |
| کاسباب نزول و شان ببينم | | در شان تو بينم آيت فتح |
| گر بزم تو خلد جان ببينم | | اي عرش سرير آسمان صدر |
| کوثر، نم ناودان ببينم | | در کعبهي خلد صدر بزمت |
| چون آتش رايگان ببينم | | بر خاک در تو آب حيوان |
| در بيداري همان ببينم | | در خواب جلالت تو ديدم |
| کورا دل ايرمان ببينم | | زين شهر دو رنگ نشکنم دل |
| کانصاف تو ديدهبان ببينم | | زين هفت رصد نيفکنم بار |
| تا منزل کاروان ببينم | | اين هفت رصد بيفکنم باز |
| چون رايت کاويان ببينم | | از جور دو مار بر نجوشم |
| تاييد ظفر رسان ببينم | | فر تو خبر دهد که چندان |
| صد دولت ديرمان ببينم | | کز عمر هزار ساله چون نوح |
| مرگ همه دشمنان ببينم | | برگ همه دوستان بسازم |
| گنج زر شايگان ببينم | | بر خاک درت زکات دربان |
| هستيش ز مستعان ببينم | | اين فال ز سعد مستعار است |
| از منزل جان نشان ببينم | | هر صبح که نو جهان ببينم |
| نقش دل آسمان ببينم | | صبح آينهاي شود که در وي |
| غم بدرقه هم عنان ببينم | | پويم پي کاروان وسواس |
| غم تعبيه در ميان ببينم | | هر بار نفس که برگشايم |
| آتشگه کاروان ببينم | | صحراي دلم هزار فرسنگ |
| يک شيردل از نهان ببينم | | خيزم که کمينگه فلک را |
| تنها روي آن زمان ببينم | | جويم که رصدگه زمان را |
| جان را سگ آستان ببينم | | در کهف نياز شيرمردان |
| قرب دو سر کمان ببينم | | چون سر به سر دو زانو آرم |
| کز ديده نمک فشان ببينم | | بس بينمک است عيش، وقت است |
| لب را مدد از فغان ببينم | | نشگفت که چون نمک بر آتش |
| دل حاملهي گران ببينم | | از جفتي غم به باد غصه |
| رومي بچگان روان ببينم | | خون گريم و از دو هندوي چشم |
| برکرده به ريسمان ببينم | | بر هر مژه در چو اشک داود |
| کاين نادره در جهان ببينم | | ميجويم داد و نيست ممکن |
| در گوهر انس و جان ببينم | | صورت نکنم که صورت داد |
| گر يک غم جان ستان ببينم | | در صد غم تازهتر گريزم |
| دل را غم غم نشان ببينم | | چو تبخالي که تب نشاند |
| از ناخنه استخوان ببينم | | ترسم که به چشم ابلق عمر |
| کش هر نفسي خزان ببينم | | عمر است بهار نخل بندان |
| سوز جگر فلان ببينم | | گفتي بروم به وهم نونو |
| من وهم تو را گران ببينم | | تو سوز مرا گران نبيني |
| زين کوچهي باستان ببينم | | عمري به کران کنم که اهلي |
| تا باده به خمستان ببينم | | بر غوره چهار مه کنم صبر |
| چون بالش پرنيان ببينم | | دل نشکنم از عتاب باري |
| کز همجنسي نشان ببينم | | بر آينه چشم از آن گمارم |
| کز آينه زعفران ببينم | | سازم دل مرده را حنوطي |
| صفها زده ميهمان ببينم | | هر شب که به صفههاي افلاک |
| شش همدم مهربان ببينم | | جوشم ز حسد که از ثريا |
| در شش سوي هفتخوان ببينم | | من خود نکنم طمع که شش يار |
| شش نقش به ساليان ببينم | | هم ظن نبرم که کعبتين را |
| در يک در آشيان ببينم | | انديک دو دست فرقدان وار |
| هم فرقت فرقدان ببينم | | پس گويم ديده گير کخر |
| با همچو دو عيش ران ببينم | | هر مه که به يک وطن مه و خور |
| لون شفق ارغوان ببينم | | حالي به وداع از اشک هر دو |
| مه در دق و ناتوان ببينم | | خور در تب و صرع دار يابم |
| کانجا دل ميزبان ببينم | | از قحط کرم کجا گريزم |
| ز آلايش سوزيان ببينم | | جاني چو مزاج مشتري پاک |
| دوشيزهي جاودان ببينم | | طبعي چو بنات نعش ز آمال |
| زودش چو زمين ستان ببينم | | ديري است که اين فلک نگون است |
| کورا ره کهکشان ببينم | | گويم که فلک علوفهگاهي است |
| تا در دم شير نان ببينم | | مه ز آن به اسد رسد به هر ماه |
| همت بدل ضمان ببينم | | گو چرخ مکن ضمان روزي |
| چون ترشي ترکمان ببينم | | از شير شتر خوشي نجويم |
| خود بيطلب و هوان ببينم | | روزي چه طلب کنم به خواري |
| نگذاشت که لعل کان ببينم | | گر موم که پاسبان درج است |
| بيمنت پاسبان ببينم | | چون بر سر تاج شاه شد لعل |
| کارم همه چون گمان ببينم | | نيني به گمان نيکم از بخت |
| خنگيش به زير ران ببينم | | بختي که سياه داشت در زين |
| زين مرهم زخم آن ببينم | | دل رفت گر اهل دل بيابم |
| ز آن خار گل جنان ببينم | | خسته نشوم ز خار نااهل |
| چون مقنع و دوکدان ببينم | | بهرام نيم که طيره گردم |
| در روي زمين روان ببينم | | اين تازه سخن که کردم ابداع |
| عين الله گنجبان ببينم | | ديوان مرا که گنج عرشي است |
| هم دست بريدهشان ببينم | | طراراني که دزد گنجاند |
| آويخته بيزبان ببينم | | طرار بريده سر چو طيار |
| هيلاج بقا چنان ببينم | | اميد به طالع است کز عمر |
| در طالع کامران ببينم | | کاندر سنهي ثون اختر سعد |
| در آذر و مهرگان ببينم | | شش سال دگر قران انجم |
| با بيست و يکش قران ببينم | | هر هفت رسد به برج ميزان |
| لب را مدد از فغان ببينم | | نشگفت که چون نمک بر آتش |
| هر هفت به يک مکان ببينم | | کيوان به کناره بينم ار چه |
| زي مکه روم امان ببينم | | گر خط شمال خسف گيرد |
| گر سوي خزر زيان ببينم | | در حد حجاز امن يابم |
| من حکم به از شبان ببينم | | در شانهي گوسپند گردون |
| زين حکم دروغسان ببينم | | تا ظن نبري که هيچ نکبت |
| هر چند ره بيان ببينم | | ره سوي يقين ندارد اين حکم |
| بطلاني داستان ببينم | | حقا که دروغ داستاني است |
| از نا بده ترجمان ببينم | | خاقاني را زبان حالت |
| درگاه خدايگان ببينم | | از خسف چه باک چون پناهم |
| در آينهي روان ببينم | | ديدار سپاه دار ايران |
| تاج قزل ارسلان ببينم | | بر هفت فلک فراخته سر |
| دين همره و همرهان ببينم | | با کوکبهي مظفر الدين |
| هم رتبت کن فکان ببينم | | امر ملک الملوک مغرب |
| جم را ملک الزمان ببينم | | جم ملکت و جم خصال و جم خوست |
| صد رستم پهلوان ببينم | | کيخسرو دين که در سپاهش |
| صد نعمان مرزبان ببينم | | پرويز هدي که در بلادش |
| بر تخت زر کيان ببينم | | تاج سر خاندان سلجوق |
| کورا گهر و کيان ببينم | | بر شاه کيان گهر فشانم |
| بهرام زحل سنان ببينم | | خورشيد اسد سوار يابم |
| در مشرق دودمان ببينم | | از رايتش آفتاب نصرت |
| سيمرغ کرم عيان ببينم | | در بارگه دوم سليمان |
| عيسيش طفيل خوان ببينم | | چون خوان سخا نهد سليمان |
| ز آتش زنه ضيمران ببينم | | گر سنگ پذيرد آب جودش |
| چتر سر خضرخان ببينم | | دستارچهي سياه نيزهاش |
| حبل الله شه طغان ببينم | | شيب سر تازيانهش از قدر |
| صد شير نر ژيان ببينم | | در يک سر ناخن از دو دستش |
| بر شاه مديح خوان ببينم | | او شاه سه وقت و چار ملت |
| در ششدر امتحان ببينم | | دهر از فزعش به پنج هنگام |
| روز آخور و شب ستان ببينم | | از هفت سپهر و هشت خلدش |
| مستسقي ده بنان ببينم | | نه چرخ ز قلزم کف شاه |
| هر هفته به هفتخوان ببينم | | روئين تن عالم است و قصدش |
| کافزونش فروتر آن ببينم | | ماند به هلال شاه مغرب |
| عيد دل خاندان ببينم | | نشگفت کز آن هلال دولت |
| کاندر حد قيروان ببينم | | آري شه مغرب آن هلال است |
| نقش رخ آبدان ببينم | | بر خاک درش ز بوس شاهان |
| هم در بن خاکدان ببينم | | گر بر سر چرخ شد حسودش |
| بر خاک چو ماکيان ببينم | | کرکس که به مکر شد سوي چرخ |
| کورا عدن و عمان ببينم | | گر خصمش امير مصر گردد |
| در عرصهي بوستان ببينم | | پندار سر خر و بن خار |
| بر پايهي نردبان ببينم | | انگار خروس پيرزن را |
| کاجري خورت اردوان ببينم | | اي تاجور اردشير اسلام |
| ز اخلاق تو دايگان ببينم | | اي سايهي حق که عقل کل را |
| گر دست تو صولجان ببينم | | گردد فلک المحيط گويت |
| کز نوبه زدن نوان ببينم | | زيبد فلک البروج کوست |
| بر رمح چو خيزران ببينم | | کيوانت شها، به عرض پرچم |
| برجيس به طيلسان ببينم | | از پرز پلاس آخور تو |
| شمشير تو را فسان ببينم | | شمشير هدي توئي که مريخ |
| ناري است که بيدخان ببينم | | خورشيد ز برق نعل رخشت |
| کايوان تو گلستان ببينم | | ناهيد سزد هزاردستان |
| باد رطب اللسان ببينم | | ز اوصاف تو تير هندسي را |
| شش زنگله در ميان ببينم | | هارون تو ماه وز ثرياش |
| يک فحل و دو ماديان ببينم | | امر تو و ابلق شب و روز |
| محکوم چو سيسجان ببينم | | محمود کفي که سيستانت |
| غزو تو به مولتان ببينم | | فتح تو به سومنات يابم |
| مالش ده سيستان ببينم | | چتر سيه و سپيد پيلت |