| بس به راحت روزگاري داشتم | | بس وفا پرورد ياري داشتم |
| گرنه روشن روي کاري داشتم | | چشم بد دريافت کارم تيره کرد |
| خوان آن سلوت که باري داشتم | | از لب و دندان من بدرود باد |
| در هر انگشتي شماري داشتم | | گنج دولت ميشمردم لاجرم |
| گريه در بر گويم آري داشتم | | خنده در لب گوئي اهلي داشتي |
| هم دلي هم يار غاري داشتم | | من نبودم بيدل و يار اين چنين |
| بس به آئين يادگاري داشتم | | آن نه يار آن يادگار عمر |
| کاشنا دل رازداري داشتم | | راز من بيگانه کس نشنيده بود |
| کز جهان انده گساري داشتم | | هرگز از هيچ اندهم انده نبود |
| کاندر انده اختياري داشتم | | انده آن خوردم که بايستي مرا |
| از طرب دلدل سواري داشتم | | آن دل دل کو که در ميدان لهو |
| هم به باغ دل بهاري داشتم | | پيش کز بختم خزان غم رسيد |
| گرنه باري بيخ و باري داشتم | | بارم انده ريخت بيخم غم شکست |
| کاندرون دل شراري داشتم | | ني بدم آتش ز من در من فتاد |
| کار ساز و ساز کاري داشتم | | کس مرا باور ندارد کز نخست |
| هم نپندارم که ياري داشتم | | من ز بيياري چو در خود بنگرم |