| کل گيتي ترا مسلم باد | | صاحبا عيد بر تو خرم باد |
| به تو بنياد عدل محکم باد | | از تو آباد ظلم ويران شد |
| بر قضا و قدر مقدم باد | | حزم و عزمت چو بر سال و جواب |
| چون تيمم به ساحل يم باد | | خدمت چرخ جز به درگه تو |
| همچنين سال و مه معظم باد | | خطبه تعظيم يافت از نامت |
| خشکسال نياز را نم باد | | دايم از فتح باب ابر سخات |
| در يسار تو خاتم جم باد | | در يمين تو خامهي آصف |
| همه زير نگين خاتم باد | | خواستم گفت ملک هفت زمينت |
| اندر آن رقعه نام من هم باد | | آسمان گفت گر منم چو نگينش |
| اشهب روزگار ادهم باد | | موکب حزمت ار نهفته رود |
| چون دم آستين مريم باد | | گرد جيش تو در دماغ ظفر |
| سقف افلاک سطح طارم باد | | از بلندي سراي قدر ترا |
| اشهب روزگار ادهم باد | | وز نژندي به چشم بدخواهت |
| شير گردون سگ معلم باد | | دست سگبانت چون قلاده کشد |
| تا قيامت شکسته طارم باد | | چرخ اگر بارگاه تو نبود |
| تا ابد سور زهره ماتم باد | | زهره خنياگريت گر نکند |
| چون زبانهاي سوسن ابکم باد | | فتنه پيش زبان خامهي تو |
| شاهراه حروف معجم باد | | پس به شکر تو تا زبان سنان |
| چون نهانخانهي جهنم باد | | حبس خصم تو با زوال خلاص |
| همه کارش چو زلف درهم باد | | بر رخي کز تو خال عصيانست |
| ترجمان تو عيسوي دم باد | | قهرمان تو موسوي دستست |
| سايهدار سپهر اعظم باد | | چتر ميمون همت عاليت |
| در مراعات نظم عالم باد | | همه سعي تو چون قران سعود |
| در مهمات نسل آدم باد | | همه عون تو چون عنايت حق |
| همچنين سال و مه مکرم باد | | بنده از مکرمات وافر تو |
| نحس و سعد زمانه مدغم باد | | در خلافت و رضاي تو همه سال |
| با همه رايهات حق ضم باد | | از همه فعلهات باطل دور |
| مرکب از نوع رخش رستم باد | | رمحت از جنس معجز موسي |
| در دو چشم عدوت توام باد | | گرد سم سمند تو مادام |
| قامتش چون بنفشه پر خم باد | | دست سرو ار دعاي تو نکند |
| نيشکر در ميان او سم باد | | ور ميان جز به خدمتت بندد |
| دولتت بيش و دشمنت کم باد | | تا کم و بيش در شمار آيد |
| اطلسش در بر از تو معلم باد | | قصبش بر سر از تو دري گشت |
| راست چونان که زير با بم باد | | مدتت با زمانه همآواز |
| تا دمي در تنست بيغم باد | | دلت از صد هزار دل به تو شاد |
| تا به جان زنده است خرم باد | | جانت اي صدهزار جانت فدي |
| همه در جنبش تو مدغم باد | | جنبش فتح و آرميدن ملک |
| از غم و رنج دست بر هم باد | | حاسدت را چو پاي درگل ماند |
| روز تو همچو عيد خرم باد | | عدل تو شب چو روز روشن کرد |