| چو اين افسانه کردم پيشش آغاز | | ضمير پاک آن مرغ سخن ساز |
| چو آتش گشت و شد با باد همراه | | شد از حال دل پر دردم آگاه |
| باستادي ز هر چشمي نهان رفت | | به خلوتگاه آن آرام جان رفت |
| حکايت خوب و استادانه ميگفت | | باو از هر دري افسانه ميگفت |
| ز دريائي نمي تقرير ميکرد | | ز من هر دم غمي تقرير ميکرد |
| سمنبر زان سخن فرياد کردي | | چو رمزي زين حکايت ياد کردي |
| بدو آئين مستوري نمودي | | بصنعت زين سخن دوري نمودي |