| دلم را سوز در جان اوفتاده | | منم يارا بدين سان اوفتاده |
| درين طبع پريشان اوفتاده | | غم چندين پريشان حال امروز |
| به دست اين عوانان اوفتاده | | چو بسته زير پاي پيل ملکي |
| چو کافر در مسلمان اوفتاده | | نهاده دين به يک سو و زهر سو |
| چو اندر گوشت کرمان اوفتاده | | ببين در نان خلق اين کژدمان را |
| به سال قحط در نان اوفتاده | | عوانان اندرو گويي سگانند |
| به چاه اندر چو کوران اوفتاده | | همه در آرزوي مال و جاهند |
| همه در گل چو مستان اوفتاده | | شکم پر کرده از خمر و درين خاک |
| که از جوعي بدين سان اوفتاده، | | تو اي بيچاره آنگه نان خوري سير |
| سگان را همچو دندان اوفتاده | | که بيني از دهان ملک بيرون |
| گزنده در گريبان اوفتاده، | | به جاي عنبر و مشکش کنون هست |
| زرش بودي ز دامان اوفتاده | | توانگر کز پي درويش دايم |
| که بادا سگ در ايشان اوفتاده، | | ازين جامه کنان کون برهنه |
| چو برف اندر زمستان اوفتاده | | بسي مردم ز سرما بر زميناند |
| به دست اين گدايان اوفتاده | | دريغا مکنت چندين توانگر |
| ولي در دست ديوان اوفتاده | | از انگشت سليمان رفته خاتم |
| ز دست مرد ميدان اوفتاده | | زنان را گوي در ميدان و چوگان |
| چو دانه پيش مرغان اوفتاده | | چو مرغان آمده در دام صياد |
| رمه در دست سرحان اوفتاده | | به عهد اين سگان از بيشباني ست |
| همه در گوسپندان اوفتاده | | رعيت گوسپنداند، اين سگان گرگ |
| درين ديوانه گرگان اوفتاده | | پلنگي چند ميخواهيم يا رب |
| سراسر ملک ويران اوفتاده | | ز دست و پاي اين گردنزنان است |
| چنين محروم و حيران اوفتاده | | ايا مظلوم سرگشته که هستي |
| به خواري چون غريبان اوفتاده | | ز جور ظالمان در شهر خويشي |
| عوانان کشته، ميران اوفتاده | | اگر صبرت بود روزي دو بيني |
| به خواري چون اسيران اوفتاده | | اميراني که بر تو ظلم کردند |
| چو ديوارش همي دان اوفتاده | | هر آن کو اندرين خانه مقيم است |
| بسي بيني بزرگان اوفتاده | | جهانجويي اگر ناگه بخيزد |
| برين دنيا پرستان اوفتاده | | ببيني ناگهان مردان دين را |
| که در ديناند نادان اوفتاده | | چه ميدانند کار دولت اين قوم |
| خداوندان فرمان اوفتاده | | به فرمان خداوند از سر تخت |
| ز سرهاي عزيزان اوفتاده | | کلاه عزت اندر پاي خواري |
| ز فرق تاجداران اوفتاده | | به آه چون تو مظلوم افسر ملک |
| برو صد ماه تابان اوفتاده | | گرش گردون سرير ملک باشد |
| چنين کس را همي دان اوفتاده | | ز بالاي عمل در پستي عزل |
| حزين در بيت احزان اوفتاده | | تو نيز اي سيف فرغاني چرايي |
| بسي ديدي سواران اوفتاده | | برين نطع اي پياده ز اسب دولت |
| نشسته دان و اينان اوفتاده | | هم آخر ديگري بر جاي اينان |
| به بادي چون درختان اوفتاده | | درين باغ اين سپيداران بيبر |
| کزين دردند نالان اوفتاده | | خدا درمان فرستد مردمي را |