| ره بزد بر ما طلسم موي تو | | ذرهاي ناديده گنج روي تو |
| اي نگارستان جانم روي تو | | گشت رويم چون نگارستان ز اشک |
| جملهي ذرات چشماروي تو | | هست خورشيد رخت زير نقاب |
| خون جانها مشک شد بر بوي تو | | در درون چون نافهي آهوي حسن |
| از سواد چشم چون آهوي تو | | شير گردون جامه ميپوشد کبود |
| آرزوي حقهي للي تو | | آسمان را چون زمين در حقه کرد |
| گر توان شد هندوي هندوي تو | | هندويم هندوي زلفت را به جان |
| طاق افتاديم از ابروي تو | | چون ز چشمت تيرباران در رسيد |
| در صفات نرگس جادوي تو | | ني که بنموديم صد سحر حلال |
| بو که برساند به خاک کوي تو | | خاک خواهم گشت تا بادي مرا |
| گر مرا بادي رساند سوي تو | | ني ز چون من خاک گردي از درت |
| چون همي هستند در پهلوي تو | | چون کند از توکسي پهلو تهي |
| کين کماني نيست بر بازوي تو | | از کمان عشق بگريز اي فريد |