| رحمت کن آخر بر روي زردم | | غافل چرايي؟ جانا، ز دردم |
| داد از تو خواهم، گويي چه کردم؟ | | خونم بريزي هر روز، چون من |
| وز خوان عشقت جز خون نخوردم | | در دام حسنت جز دم نديدم |
| من نامهي خود در مينوردم | | نقش غمم چون بر دل نوشتي |
| باشد که آرد پيش تو گردم | | خاک نسيمت گردم به زاري |
| بويي بياور زان باغ وردم | | اي باد مشکين، گر ميتواني |
| گر اوحدي را، ديدم نه مردم | | تا ديدهي من ديد آن صنم را |